आज बंद है
धंधा पानी चंद है
आना जाना बंद है
पेट की आग मंद है
क्यूंकि आज बंद है
शाम का चूल्हा नहीं जलेगा
मुन्ना दूध को नहीं मचलेगा
हाथ बहुत तंग है
क्यूंकि आग बंद है
आज नहीं होना है बीमार
नहीं बनना है लाचार
अस्पताल भी नहीं संग है
क्यूंकि आज बंद है
महंगाई के खिलाफ उठी है आवाज़
उसी का है यह आगाज़
कमजोर हो या जाबाज़
सबका हाल तंग है
क्यूंकि आज बंद है


1 Comments:
Bahut achha likhi hain! aapne politica band ka sahi-sahi bakhaan kiya hai. aapka blog ki dinya me swagat hai...! aap aise hi likhti rahen..........!
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