Saturday, July 10, 2010

आज बंद है

धंधा पानी चंद है
आना जाना बंद है
पेट की आग मंद है
क्यूंकि आज बंद है

शाम का चूल्हा नहीं जलेगा
मुन्ना दूध को नहीं मचलेगा
हाथ बहुत तंग है
क्यूंकि आग बंद है

आज नहीं होना है बीमार
नहीं बनना है लाचार
अस्पताल भी नहीं संग है
क्यूंकि आज बंद है

महंगाई के खिलाफ उठी है आवाज़
उसी का है यह आगाज़
कमजोर हो या जाबाज़
सबका हाल तंग है
क्यूंकि आज बंद है

1 Comments:

At July 10, 2010 at 5:25 AM , Blogger जिंदगी की तलाश में said...

Bahut achha likhi hain! aapne politica band ka sahi-sahi bakhaan kiya hai. aapka blog ki dinya me swagat hai...! aap aise hi likhti rahen..........!

 

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