आखिर हम भी इन्सान हैं

कभी - कभी जिंदगी में ऐसी सचचाई से रु-ब-रु होना पड़ता है कि छोटे से एक पल में हम बहुत कुछ सीख लेते हैं। सच ही कहा गया है किसी के लिए सजा तो किसी के लिए मज़ा होती है ये ज़िन्दगी। ये उनकी कहानी है जो सचमुच में हमआप कि तरह होते हुए भी काफी अलग है हमसे। काम का प्रेशर था सो सोचा कुछ अलग काम किया जाय, बस मैंने हिज़ड़ो पर स्टोरी करने की सोची। पहले तो थोडा डर लगा कि पता नहीं कैसे वयव्हार करेगे वे सभी। दो दिन तो लाइन अप करने में लग गए। खैर हमारी बात काली हिजड़ा से हुई। मै उसके घर गयी। सामने वाले कमरे में एक पलंग लगा था वह सामान्य से काफी ऊँचा था। मैंने जब इसके बारे में पूछा तब काली ने बताया कि यहाँ तो सभी मर्द ही है इसलिये ये सब ऐसा ही है। बगल के कमरे में पूनम हिजड़ा टीवी देख रही थी। काली पहले वार्ड पार्षद रह चुकी थी, सो उसने राजनीति बात शुरू की। हमने पूनम के बारे में पूछा तब पता चला की वह काली की शिष्य है। अंदर किचन में सीमा हिजड़ा रोटियां बना रही थी। काली हमें बता रही थी कि हमारे कोई नाते रिश्तेदार तो होते नहीं सो हमारे यहाँ गुरु- शिष्य परम्परा चलती है इसलिए हमारी पत्नीसमझो दोस्त समझो या बच्चे, सभी कुछ ये ही है। यानी काली कि शिष्य थी पूनम और पूनम की शिष्य सीमा। तीनो या साथ ही रहते थे। अब जब पूनम से बात होने लगी तब उसने बताया कि जब किसी गुरु हिजड़े कि मौत हो जाती है तब पत्नी कि तरह उसका शिष्य अपनी चूड़ी तोडती है और सफेद साडी भी पहनती है। बीच में काली बोल पड़ी थी कि किस तहर घर वाले उससे कटते है। यही नहीं पैसे कि जरुरत पड़ती है तब उससे मदद भी मांगते है। लेकिन किसी क सामने उसे पहचानने से भी इंकार कर देते है। हद तो तब हो गयी, जब सगी माँ भी उसे पहचानने से मुकर गयी। एक बेटा जब मर्डर करके भी आता है तब भी माँ उसे अपनाने स इंकार नहीं करती, फिर जब भगवन न हमें एषा बनाया है तब हमसे ऐसी दुरी क्यूँ ? काली सा सवाल बिलकुल जायज था। पर मेरे पास कोई जबाब नहीं था। दरअसल काली का सवाल सिर्फ मुझसे नहीं, पुरे समाज स था। ऐसा ही हाल कुछ पूनम का भी था, उसे भी अपने बहन कि शादी में आने स मन कर दिया गया था। बातो ही बातो में सीमा न कुछ म्यूजिक लगा दिया, पूनम न अपने आँचल स आंसू पोछे और जुट गयी नाचने में, फिर भी एक सवाल बाकी ही था आखिर हम भी इन्सान है.

